Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

ज्वाला जी या माता ज्वाला देवी, 51 शक्तिपीठ में से एक जो हिमाचल राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित है – Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

1. प्रस्तावना – इंट्रो

ज्वाला जी या माता ज्वाला देवी, एक उच्च शक्ति के स्थानों में से एक, इसे धूमा देवी का स्थान माना जाता है। यह स्थान 51 शक्तिपीठों में एक है जिसे ज्वाला देवी मंदिर भी कहा जाता है, भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित एक हिंदू मंदिर है। चिंतपूर्णी, नैना देवी, शाकम्भरी शक्तिपीठ, विंध्यवासिनी शक्तिपीठ, और वैष्णो देवी के समान सिद्ध स्थानों में शामिल है। इसी जगह पर भगवती सती की महाजिह्वा, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र द्वारा कटकर गिरी थी। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

Jwala ji Temple History & Best Travel Tips - ज्वाला जी

मंदिर में, भगवती के नौ रूपों के दर्शन किया जा सकते है, जिनमें महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, हिंगलाज भवानी, विंध्यवासिनी, अन्नपूर्णा, चण्डी देवी, अंजना देवी, और अम्बिका देवी शामिल हैं। उत्तर भारत की प्रसिद्ध नौ देवियों के दर्शन के दौरान, चौथा दर्शन माँ ज्वाला देवी का ही होता है। इसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित “अष्टादश महाशक्तिपीठ स्तोत्र” में वैष्णवी कहा गया है।

ज्वाला देवी मंदिर
ज्वालामुखी मंदिर
ज्वाला देवी मन्दिर
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धताहिन्दू धर्म
देवताज्वाला जी
त्यौहारनवरात्रि
अवस्थिति जानकारी
अवस्थितिज्वाला जी हिमाचल प्रदेश
राज्यहिमाचल प्रदेश
देशभारत
वास्तु विवरण
निर्माताभूमिचंद राजा
निर्माण पूर्णसतयुग
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2. स्थान

  • ज्वाला माँ का ये पवित्र मंदिर कांगड़ा घाटी की शिवालिक श्रृंखला की गोद में स्थित है जिसे “कालीधार” कहा जाता है। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • ये मंदिर हिमाचल प्रदेश राज्य के खुबसूरत जिले कांगड़ा में अपने महान इतिहास, धार्मिक कथाओं और कई चमत्कारी किस्से लिए माँ की कृपा से आज भी विशाल पहाड़ों की गोद में स्थापित है। पता – ज्वाला जी मंदिर, ज़िला काँगड़ा, नियर बस स्टैंड, हिमाचल प्रदेश, भारत।

3. महत्व

  • ये माँ भगवती के शक्तिपिठो में, माँ ज्वाला देवी एक प्रमुख शक्ति पीठ है जहाँ आज भी माँ की पवित्र जोते बिना तेल या बाती के सतयुग से निरन्तर जलती आ रही है। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • इसी जगह पर माँ भगवती सती की महाजिह्वा, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र द्वारा कटकर गिरी थी और चिंतपूर्णी, नैना देवी, शाकम्भरी शक्तिपीठ, विंध्यवासिनी शक्तिपीठ, और वैष्णो देवी के समान सिद्ध स्थानों में शामिल है।
  • इस पवित्र मंदिर से कई इतिहासिक कथाऐ जुडी है जो मंदिर की महानता को दर्शाती है। माँ का जोय्ती रूप दर्शन अद्भुत है जिसे करने के बाद इंसान मंत्र – मुगद हो जाता है। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • ज्वाला जी माता मंदिर हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह मंदिर देवी दुर्गा की नौ ज्योतियों को समर्पित है। मंदिर को देवी दुर्गा की शक्ति और दया का प्रतीक माना जाता है।

4. महत्वपूर्ण विशेषताएँ

Jwala ji Temple History & Best Travel Tips - ज्वाला जी

Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • ज्वाला देवी मंदिर में माँ की कोई प्रतिमा या मूर्ति नहीं है बल्कि माँ 9 जोय्ती रूप में दर्शन देती है जिनमें महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, हिंगलाज भवानी, विंध्यवासिनी, अन्नपूर्णा, चण्डी देवी, अंजना देवी, और अम्बिका देवी शामिल हैं।
  • मंदिर में माँ की चमत्कारी पवित्र ज्योति है जो बिना किसी तरल प्रदार्थ के निरंतर जलती रहती है और उनकी ही पूजा आराधना की जाती है।
  • Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी – उत्तर भारत की विशव प्रसिध नौ देवियों के दर्शन यात्रा के दौरान, चौथा दर्शन माँ ज्वाला देवी का ही होता है। इसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित “अष्टादश महाशक्तिपीठ स्तोत्र” में वैष्णवी कहा गया है।
  • सतयुग से इन ज्योतियों को कई बार कई लोगो ने परखने की कोशशि की मगर इनका रहस्य कोई नहीं जाना पाया, अकबर ने माँ की जोय्तो को भुजाने का बड़ा प्रयास किया मगर उसे कुछ हाथ न लगा।
  • कलयुग में भी जोय्तीयों का रहस्य जानने के लिए कई तरह के वैज्ञानिक, विशेषग्य आदि ने पूरी खोज की, कई महीनो गहरा अध्यन किया मगर वो हर बार विफ़ल ही रहे। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • ज्वाला जी न केवल ज्वाला मुखी, कांगड़ा या हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए बल्कि पूरे विश्व के लोगों के लिए एक महान विरासत केंद्र है।

5. इतिहास ज्वाला जी माँ

  • कहा जाता है की जब एक बार राक्षसों ने हिमालय के पहाड़ों पर प्रभुत्व जमा लिया, और देवताओं को प्रतिदिन सताने लगे, जिससे देवता और दिव्य प्राणियों को परेशानी हुई। सभी देवो ने भगवान से प्रथना की और अपनी बात उनको बताई तो भगवान विष्णु के नेतृत्व में देवताओं ने उन्हें नष्ट करने का निर्णय लिया।
  • सभी ने अपनी शक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया, पृथ्वी से बड़े पैमाने पर आग की लपटें निकलने लगीं। इन उग्र लपटों से एक कन्या निकली, जो मौलिक ऊर्जा, पहली ‘शक्ति’ का प्रतीक थी – जिसे सती या पार्वती के नाम से जाना जाता है। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • सती, जिन्हें पार्वती के नाम से भी जाना जाता है, प्रजापति दक्ष को मिले वरदान के कारण उनके घर जन्म लिया और उनके निवास में पली-बढ़ीं और बाद में भगवान शिव की पत्नी बनीं। एक बार, सती के पिता ने एक महान यज्ञ आयोजित किया मगर शिव और सती को आमंत्रित नहीं दिया.
  • माँ सती फ़िर भी ये भूल कर वहां चली गई, जबकि भगवान शिव ने उनको मना किया था, सती जी के पिता ने उनके स्वागत की जगह उन्हें अपमानित किया और उनके पति भगवान शिव का भी अपमान किया, और इसे स्वीकार करने में असमर्थ होने पर सती ने वही हवान्खुंड में आत्मदाह कर लिया।
  • जब भगवान शिव को अपनी पत्नी की मृत्यु का पता चला, तो उनके क्रोध की कोई सीमा नहीं रही। उन्होंने वीरभद्र और बद्रकाली को भेजा, उन्होंने प्रजापति का सेना सहित वध कर दिया। भगवान् शिव सुध-बुध खोए माँ सती के निर्जीव शरीर को लिए लम्बे समय तक सब तरफ़ विचरने लगे, जिससे तीनों लोकों में उथल-पुथल मच गई। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • अन्य देवताओं ने भय से कांपते हुए भगवान विष्णु से सहायता मांगी। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी – शिव के क्रोध को शांत करने के लिए, विष्णु जी ने अपने सुदर्शन से माँ सती के अंगो को अलग कर दिया, जिससे सती के अवशेष बिखर गए। जहां-जहां ये टुकड़े गिरे, वहां-वहां पवित्र शक्तिपीठ स्थापित हो गए। ऐसा कहा जाता है कि सती की जीभ ज्वाला जी में गिरी थी, जो सदियों पुरानी पर्वत दरार के भीतर एक शाश्वत लौ के रूप में प्रकट हुई, जो एक मासूम नीली चमक बिखेर रही थी।

6. मंदिर स्थापना – Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • किंवदंती एक चरवाहे का भी वर्णन करती है जिसने पाया कि उसकी गाय रहस्यमय तरीके से बिना चरे दूध दे रही है। गाय का पीछा करते हुए, उसने जंगल से एक युवा कन्या को निकलते देखा, जिसने दूध पिया और एक उज्ज्वल रोशनी में गायब हो गई।
  • चरवाहे ने इस पवित्र भूमि और चमत्कारी घटना की सूचना राजा को दी। राजा ने खोजा लेकिन पवित्र स्थान नहीं मिला। वर्षों बाद, चरवाहा वापस लौटा और उसने बताया कि उसने पर्वत के ऊपर आग की लपटें देखीं।
  • भूमिचंद राजा ने पवित्र स्थल की खोज की, एक मंदिर का निर्माण किया और नियमित पूजा की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि बाद में पांडवों ने इस मंदिर का दौरा किया और इसका जीर्णोद्धार किया।

7. ध्यानू-भक्त की कथा

जिन दिनों भारत में मुग़ल सम्राट अकबर का शासन था, उन्ही दिनों की यह घटना है | नदौन ग्राम निवासी माता का एक सेवक एक हज़ार यात्रियों सहित माता के दर्शनों के लिये जा रहा था | इतना बड़ा दल देखकर बादशाह के सिपाहियों ने चांदनी चौक दिल्ली में उन्हें रोक लिया और अकबर के दरबार में ले जाकर ध्यानू-भक्त को पेश किया गया। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • अकबर ने पूछा, “तुम इतने आदमियों को साथ लेकर कहां जा रहे हो ?” – ध्यानू-भक्त ने हाथ जोड़कर उत्तर दिया, “मैं माँ ज्वाला – माई के दर्शन के लिये जा रहा हूँ। मेरे साथ जो लोग है, वे भी माता के भक्त है और यात्रा पर जा रहे हैं।”
  • अकबर ने ये सुनकर कहा, ” ये ज्वाला माई कौन हैं ? और वहां जाने से क्या होगा ?”ध्यानू-भक्त ने उत्तर दिया, “महाराज ! ज्वाला माई संसार की रचना एवं पालन करने वाली माता हैं। वे भगतों की सच्चे ह्रदय से की प्राथना स्वीकार करती हैं तथा उनकी सब मनोकामनाए पूरी करती हैं। उनका प्रताप ऐसा हैं उनके स्थान पर बिना तेल-बाती के ज्योति जलती रहती हैं। हम लोग प्रतिवर्ष उनके दर्शन करने जाते हैं।”
  • अकबर बोले, “तुम्हारी ज्वाला माई इतनी ताकतवर है, इसका यकीं हमें किस तरह आएगा, आखिर तुम माता के भक्त हो, अगर कोई करिश्मा दिखाओ तो हम भी मान लेंगे।” – ध्यानू ने नम्रता से उत्तर दिया, श्रीमान ! मैं तो माता का एक तुच्छ सेवक हु, मैं भला क्या चमत्कार दिखा सकता हूँ ? Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • अकबर ने कहा, “अगर तुम्हारी बंदगी पाक एवं सच्ची है तो देवी माता जरूर तुम्हारी इज्जत रखेगी। अगर वह तुम्हारे जैसे भक्तों का ख्याल न रखे तो फिर तुम्हारी इबादत का क्या फायदा ? या तो वह देवी ही यकीं के काबिल नहीं है, या तुम्हारी इबादत ही झूठी है। इम्तिहान के लिए हम तुम्हारे घोड़े की गर्दन अलग किये देते है, तुम अपनी देवी से कहकर उसे दुबारा ज़िंदा करवा लेना।” Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

इस प्रकार घोड़े की गर्दन काट दी गई। ध्यानू -भक्त ने कोई उपाय न देख कर बादशाह से एक माह की अवधि तक घोड़े के सर व् धड़ को सुरक्षित रखने की प्राथना की। अकबर ने ध्यानू भक्त की बात मान ली। यात्रा करने की अनुमति भी मिल गई। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • बादशाह से विदा लेकर ध्यानू भक्त अपने साथियो सहित माता के दरबार में जा उपस्थित हुआ। स्नान – पूजन आदि करने के बाद रात भर जागरण किया। प्रातः काल आरती के समय हाथ जोड़कर ध्यानू ने प्रार्थना कि, “हे मातेश्वरी ! आप तो अन्तर्यामी है , बादशाह मेरी भक्ति की परीक्षा ले रहा है, मेरी लाज रखना, मेरे घोड़े को, अपनी कृपा व् शक्ति से जीवित कर देना, चमत्कार प्रकट करना, अपने सेवक को कृतार्थ करना।
  • यदि आप मेरी प्राथना स्वीकार नहीं करेगी तो मैं भी अपना सर काटकर आपके चरणो में अर्पित कर दूंगा, क्योकि लज्जित होकर जीने से मर जाना अधिक अच्छा है। यह मेरी प्रतिज्ञा है | कृप्या आप उत्तर दें ।”

कुछ समय तक मौन रहा। कोई उत्तर न मिला। – Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • इसके पश्चात भक्त ने तलवार से अपना शीश काट कर देवी को भेंट कर दिया। उसी समय साक्षात ज्वाला माई प्रकट हुई और ध्यानू – भक्त का सर धड़ से जुड़ गया, भक्त जीवित हो उठा। माता ने भक्त से कहा, “दिल्ली में घोड़े का सर भी धड़ से जुड़ गया है। चिंता छोड़कर कर दिल्ली पहुँचो। जो कुछ इच्छा हो वर माँगो।
  • ध्यानू – भक्त ने माता के चरणों में शीश झुकाकर प्रणाम कर निवेदन किया, “हे जगदम्बे ! आप सर्व शक्तिमान है, हम मनुष्य अज्ञानी है, भक्ति की विधि भी नहीं जानते। फिर भी विनती करता हूँ की जगतमाता ! आप अपने भक्तो की इतनी कठिन परीक्षा न लिया करें। प्रत्येक संसारी -भक्त आपको शीश भेंट नही दे सकता। कृपा करके, हे मातेश्वरी ! किसी साधारण भेंट से ही अपने भक्तो की मनोकामनाएं पूर्ण किया करो।”
  • “तथास्तु ! अब से मैं शीश के स्थान पर केवल नारियल की भेंट व् सच्चे ह्रदय से की गई प्रार्थना द्वारा मनोकामना पूर्ण करुँगी ।” यह कहकर माता अंतर्ध्यान हो गई। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • इधर तो यह घटना घटी, उधर दिल्ली में जब मृत घोड़े का सर व् धड़, माता की कृपा से अपने आप जुड़ गये और वो जीवित हो उठा तो सब दरबारियों सहित बादशाह अकबर आश्चर्य में डूब गये। बादशाह ने अपने सिपाहियों को ज्वाला जी भेजा। सिपाहियों ने वापस आकर अकबर को सुचना दी , ” की वहां ज़मीं से आग की लपटे निकल रही है, शायद उन्ही की ताकत से यह करिश्मा हुआ है। अगर आप हुक्म दे तो इन्हे बंद करवा दे। इस तरह हिन्दुओं की इबादत की जगह ही खत्म हो जाएगी। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • अकबर ने स्वीकृति दे दी। परन्तु कुछ इतिहासकारो का मानना है की अकबर की स्वीकृति के बिना ही शाही सिपाहियों ने ऐसा किया था। कहा जाता है की शाही सिपाहियों ने सवर्प्रथम माता की पवित्र ज्योति की ऊपर लोहे की मोटे-मोटे तवे रखवा दिए। परन्तु दिव्य – ज्योति तवे फाड़कर ऊपर निकल आई।
  • इसके पश्चात एक नहर का बहाव उस और मोड़ दिया गया, जिससे नहर का पानी निरंतर ज्योति के ऊपर गिरता रहे। फिर भी ज्योतियो का जलना बंद न हुआ। शाही सिपाहियों ने अकबर को सुचना दी। जोतों का जलना बंद नहीं हो सकता, हमारी सारी कोशिशे नाकाम हो गई। आप जो मुनासिब हो, वह करें।
  • यह समाचार पाकर बादशाह अकबर ने दरबार के विद्वानों से परामर्श किया। विद्वानों ने विचार करके कहा की आप सवयं जा कर दैवी-चमत्कार देखें तथा नियमानुसार भेंट आदि चढ़ाकर दैवी माता को प्रसन करें। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • अकबर ने विद्वानों की बात मान ली। सवा मन पक्का सोने का भव्य छत्र तैयार हुआ। फिर वह छत्र अपने कंधे पर रखकर नंगे पेरों ज्वाला जी पहुंचे और दिव्य ज्योति के दर्शन किए, मस्तक श्रद्धा से झुक गया, अपने मन में पश्चाताप होने लगा और कहने लगा। हे माँ, मैं आपको सवा मन पक्का सोने का भव्य छत्र भेंट सबरूप चढ़ा रहा हूँ। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
Jwala ji Temple History & Best Travel Tips - ज्वाला जी

Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • आज तक किसी राजा ने आपको सवा मन पक्का सोने का भव्य छत्र भेंट नही किया होगा। कृप्या मेरी भेंट स्वीकार कीजिए। अकबर के घमंड भरे शब्द बोलते ही छत्र पर एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और फिर अकबर से वह छत्र नीचे गिर गया और जैसे ही वह छत्र गिरा वो सोने का न रहा, किसी विचित्र धातु का बन गया , जो न लोहा था , न पीतल, न ताम्बा न और कोई धातु।

अर्थार्त दैवी ने भेंट अस्वीकार कर दी। – Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • इस चमत्कार को देखकर अकबर ने अनेक प्रकार से स्तुति करते हुए माता से क्षमा की भीख मांगी और अनेक प्रकार से पूजा करके दिल्ली वापिस लौटा। आते ही सिपाहियों के लिए सभी भक्तों से प्रेम-पूर्वक व्यव्हार करने का आदेश दिया। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • अकबर बादशाह द्वारा चढ़ाया गया खंडित छत्र ज्वाला माता के दरबार में आज भी पड़ा देखा जा सकता है जो देखने से सोने का प्रतीत होता है भार भी सोने का ही है पर किसी भी धातु का नही हैं।

8. ज्वाला जी माता मंदिर की यात्रा कैसे करें

Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी – मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण ज्वाला जी तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और मौसम सुहावना होने के कारण पूरे वर्ष भी पहुंचा जा सकता है। इसलिए, तीर्थस्थल पूरे वर्ष सभी उम्र के लोगों के लिए सुलभ है। यह मंदिर होशियारपुर से 75 किलोमीटर शिमला से 183 किलोमीटर और धर्मशाला से 51 किलोमीटर दूर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए, आप शिमला या धर्मशाला से बस या टैक्सी ले सकते हैं। मंदिर के पास कोई रेलवे स्टेशन नहीं है।

हवाईजहाज से Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • हिमाचल प्रदेश में निकटतम हवाई अड्डा गग्गल ज्वालाजी से 50 किमी दूर है।
  • शिमला का हवाई अड्डा लगभग 160 किलोमीटर दूर है।
  • चंडीगढ़ हवाई अड्डा लगभग 200 किलोमीटर दूर है
  • हिमाचल प्रदेश में कुल्लू हवाई अड्डे से दूरी लगभग 250 किलोमीटर है।
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगभग 480 किलोमीटर दूर है।

ट्रेन द्वाराJwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • निकटतम नैरो गेज रेलवे स्टेशन ज्वालाजी रोड रानीताल है जो मंदिर से 20 किमी की दूरी पर है।
  • निकटतम ब्रॉडगेज रेलवे स्टेशन 120 किमी की दूरी पर पठानकोट है।
  • चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन 200 किलोमीटर की दूरी पर है।

सड़क द्वारा – Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

मोटर योग्य सड़कें इस तीर्थस्थल को दिल्ली, चंडीगढ़ और धर्मशाला से जोड़ती हैं। इन स्थानों से टैक्सियाँ किराये पर ली जा सकती हैं। यह पूरा पहाड़ी क्षेत्र है जहाँ से घाटी के चारों ओर सुंदर प्राकृतिक दृश्य दिखाई देता है। पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के सभी महत्वपूर्ण शहरों से लगातार राज्य परिवहन बस सेवा उपलब्ध है। मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। लगातार बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। विभिन्न स्थानों पर डीलक्स कोच भी उपलब्ध हैं।

Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी – मुख्य स्टेशनों से दूरियाँ इस प्रकार हैं:-

दिल्ली – 475 किमी # चंडीगढ़ – 200 किमी। # मनाली – 200 किमी. #पठानकोट – 120 किमी. # शिमला – 205 किमी # धर्मशाला – 60 किमी। #होशियारपुर – 85 किमी. # गग्गल हवाई अड्डा – 50 किमी. # जम्मू – 300 किमी.

ज्वाला जी माता मंदिर की यात्रा के लिए सुझाव – Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

  • मंदिर की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय नवरात्रि का त्योहार है। इस दौरान मंदिर को सजाया जाता है और भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
  • मंदिर ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए ऊंचाई की बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीना और आराम करना महत्वपूर्ण है।
  • मंदिर में फोटो और वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं है।

9. क्या क्या दर्शन करे ज्वाला जी माता मंदिर

  • माँ पवित्र ज्योति – मंदिर में माँ की पवित्र ज्योति के दर्शन करे माँ ज्योति रूप में ही इस मंदिर मे स्थापित है यहाँ माता नौ रूपों का दर्शन किया जा सकते है, जिनमें महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, हिंगलाज भवानी, विंध्यवासिनी, अन्नपूर्णा, चण्डी देवी, अंजना देवी, और अम्बिका देवी शामिल हैं।
  • शयन कक्ष – शयन कक्ष मुख्य मंदिर के समीप ही बना माँ का विश्राम गृह है जहाँ रोज़ माँ का बिस्तर सजाया जाता हो और भोग रखा जाता है, ये बहुत ही सुन्दर है इसके दर्शन जरुर करे। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • गोरख डिब्बी – ये माता मंदिर के पास से कुछ सीढियां ऊपर चढ़ कर, एक मंदिर है जहां उबलते हुए पानी का एक कुंड है, देखने में जल गर्म लगता है मगर माता की कृपा और बाबा गोरख जी योग माया से ये ठण्डा रहता है और धुप दिखाने पर ज्वाला दर्शन देती है।

10. ज्वाला जी मंदिर के पास अन्य मंदिर

  • माँ तारा देवी मंदिर माता तारा देवी मंदिर -माता तारा देवी मंदिर ज्वाला जी मंदिर क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह ज्वाला जी मंदिर के ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 100 सीढ़ियाँ हैं जो माता ज्वाला जी मंदिर के पिछले गेट के पास से शुरू होती हैं। तारा देवी मंदिर से ज्वाला जी टाउन का पूरा अद्भुत दृश्य देखा जा सकता है। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • माता अष्टभुजा मंदिर – यह मंदिर मां ज्वाला जी मंदिर से 1 किमी दूर है। इस प्राचीन मंदिर में आठ भुजाओं वाली देवी की एक पत्थर की मूर्ति है। इससे सटे अन्य छोटे मंदिर भी हैं। कई स्थानीय लोग और हिमाचल प्रदेश के अन्य स्थानों से लोग इस मंदिर में आते हैं और माँ अष्टभुजा की पूजा करते हैं। जो लोग यहां दृढ़ विश्वास के साथ प्रार्थना करते हैं, वे कभी खाली हाथ नहीं जाते।
  • टेडा मंदिर या श्रीरघुनाथ जी मंदिर – “टेड़ा’ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर 1905 में आए भूकंप के बाद खड़ा हुआ है। कहा जाता है कि राम लक्ष्मण और सीता यहां रुके थे और माना जाता है कि पहला मंदिर पांडवों द्वारा बनाया गया था। यह मंदिर लगभग 3 किलोमीटर दूर है और माँ ज्वाला जी मंदिर के ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है। टेड़ा मंदिर का रास्ता तारा देवी मंदिर से है। Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी
  • नागिनी माता मंदिर – यह मंदिर माँ ज्वाला जी मंदिर से 4 किमी दूर है और श्री राहुनाथ जी मंदिर के समान मार्ग पर है। नागिनी माता मंदिर ज्वाला जी के ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है। नागिनी माता मंदिर में हर साल जुलाई/अगस्त में एक सुंदर मेला लगता है।
  • अर्जुन नागा मंदिर – यह मंदिर माँ ज्वाला जी मंदिर के निकट है और मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 200 सीढ़ियाँ हैं जो माता ज्वाला जी मंदिर के सामने वाले द्वार के पास से शुरू होती हैं Jwala ji Temple History & Best Travel Tips – ज्वाला जी

समापन

यदि आप पहाड़ों में धार्मिक यात्रा करने की सोच रहे है तो माँ ज्वाला मंदिर जरुर जाएँ। ज्वाला माँ मंदिर एक अद्वितीय धार्मिक स्थान है जो आत्मिक साक्षात्कार और शक्ति के अनुभव के लिए जाना जाता है। आप स्थानीय आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लें सकते और धार्मिक यात्रा के साथ हिमाचल भी घूम सकते है।

माँ आपकी यात्रा शुभ करे

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“जय माता दी”

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ज्वालामुखी मंदिर कौन से राज्य में स्थित है?

ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के ज़िला काँगड़ा में स्तिथ एक शक्तिपीठ है जो 51 शक्तिपीठों में से एक है।

मां ज्वाला देवी मंदिर कहां है?

भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित एक हिंदू मंदिर है। चिंतपूर्णी, नैना देवी, शाकम्भरी शक्तिपीठ, विंध्यवासिनी शक्तिपीठ, और वैष्णो देवी के समान सिद्ध स्थानों में शामिल है। ये ५1 शक्तिपीठों में से एक है।

ज्वाला देवी मंदिर का रहस्य

इसी जगह पर भगवती सती की महाजिह्वा, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र द्वारा कटकर गिरी थी। ये माँ भगवती के शक्तिपिठो में, माँ ज्वाला देवी एक प्रमुख शक्ति पीठ है जहाँ आज भी माँ की पवित्र जोते बिना तेल या बाती के सतयुग से निरन्तर जलती आ रही है।

ज्वाला देवी कैसे पहुंचे

 चंडीगढ़ से अनादपुर साहिब -उना होते हुए देहरा पोहुंचे गे, वाहन से माँ ज्वाला मंदिर पास ही है लोकल बस आदि ले सकते है। एक रास्ता पठानकोट की तरफ़ से छोटी लाइन ट्रैन ले कर गुलेर होते हुए या ज्वालामुखी रोड स्टेशन तक ले जाएगी।

ज्वाला देवी की उत्पत्ति कैसे हुई?

इसी जगह पर भगवती सती की महाजिह्वा, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र द्वारा कटकर गिरी थी।

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